पाकिस्तान के डीप स्टेट की गलतियां: भारत और तालिबान के बदलते संबंधों का असर
पाकिस्तान की डीप स्टेट की ऐतिहासिक गलती
आज के दिन पाकिस्तान का डीप स्टेट, जिसमें उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई और सेना शामिल है, अपने फैसलों पर पछता रहा होगा। पिछले दो हफ्तों में हुई घटनाओं ने न केवल पाकिस्तान की स्थिति को कमजोर किया है बल्कि भारत और तालिबान के संबंधों को नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया है।
भारत और तालिबान की दुबई बैठक
हाल ही में दुबई में भारत के फॉरेन सेक्रेटरी विक्रम मिस्त्री और तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह बैठक लंबी चली और इसके दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। पाकिस्तान के डीप स्टेट के लिए यह बैठक तनाव का कारण बन गई।
भारत की कड़ी निंदा और तालिबान का पक्ष
इस बैठक से ठीक एक दिन पहले भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया। इसमें पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए हवाई हमले की कड़ी निंदा की गई, जिसमें 45 अफगानी नागरिक मारे गए। भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह तालिबान और अफगानिस्तान का समर्थन करता है।
तालिबान के लिए भारत का समर्थन क्यों महत्वपूर्ण है?
यह पहली बार है जब किसी बड़े देश ने खुलकर तालिबान का पक्ष लिया है। इससे पहले पाकिस्तान के हमले के बाद दुनिया के किसी भी देश ने तालिबान का समर्थन नहीं किया था। भारत का यह कदम तालिबान के लिए बड़ा समर्थन है और इसका असर पाकिस्तान-तालिबान संबंधों पर पड़ना तय है।
पाकिस्तान की नीति पर सवाल
पिछले दो हफ्तों में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर हवाई हमले करके तालिबान का भरोसा खो दिया है। तालिबान के नेताओं को अब यह साफ दिखने लगा है कि पाकिस्तान उनका शत्रु बन चुका है और भारत ही ऐसा देश है जो उनके साथ सहयोग कर सकता है।
भविष्य की ओर
भारत और तालिबान के बीच संबंध अब नए स्तर पर पहुंचने वाले हैं। यह बैठक न केवल संबंधों की शुरुआत है, बल्कि भविष्य में भारत तालिबान सरकार को मान्यता देने की ओर भी संकेत करती है। इससे पाकिस्तान की स्थिति और कमजोर हो सकती है।
निष्कर्ष
पाकिस्तान की डीप स्टेट द्वारा की गई गलतियों ने भारत और तालिबान को करीब ला दिया है। यह न केवल पाकिस्तान के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। आने वाले समय में भारत और तालिबान का यह सहयोग पाकिस्तान की नीतियों पर बड़ा असर डालेगा।
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